ग्रां ग्रीं ग्रूं ग्रैं
नक्षत्र विवरण वर्तमान प्रचलित Astrology और Astronomy के निर्धारित मापदण्डों से परे है! Reader has the full right not to believe it.
धन का तो पता नहीं, लेकिन “गूजी” के भंडार में गंभीरता और समझ की कोई कमी नहीं! धन और अन्य सुविधाएँ इनकी पुत्रियों ऋद्धि तथा सिद्धि के पास हैं।
गणेश पूजन के बिना आषाढ़ पूर्णिमा के “Black Rock–Bramha Jee” कंट्रोल नहीं होते।
स्थान कुबेर का और पूजन गणेश का, वह भी गुरु के रूप में! अनुचित बिल्कुल भी नहीं है, लेकिन गलत तो है।
ब्रम्ह-कुबेर को कुछ अर्पित न भी करें, तो भी उनका नाम और पहचान बने रहने दें।
वरना फिर भैरव जी भी अपने चेले कुबेर की वकालत करने आ जाएँगे। और यदि दोनों विवादास्पद शक्तियाँ मिल गए, तो सारी व्यवस्थाएँ एक ही दिन में ध्वस्त हो जाएँगी!
ब्रम्हा जी को चूहा बनाकर उसकी सवारी करने वाले गणेश महोदय भी कम नहीं हैं।
कभी-कभी तो ये स्वयं को शिव का पिता भी समझ बैठते हैं और अपने तात का रास्ता तक रोक लेते हैं!
“गु” को भी अंधकार ही कहा गया है। और कंसल्टेंट बिल्कुल भी नहीं बताएगा कि उग्रकाल कौन है और गयासुर कौन!
हाँ, इतना अवश्य बताएगा कि विशुद्धि चक्र का स्थान, अर्थात् गर्दन का ही शुद्धिकरण किया गया था इनका।
हर नक्षत्र में गणेश जी नहीं बैठे हैं। और ये 32, 36 या 52 भी बिल्कुल नहीं हैं!
गणेश जी का गजकुंभ धनिष्ठा में ही अवस्थित है।
धनिष्ठा में न तो कोई गाय है, न गायत्री और न ही गंगा। साथ ही यहाँ न कोई गुरु है और न बृहस्पति।
यहाँ केवल गणेश हैं, अन्य कोई नहीं!
अब इनके रूप और नाम अनेक हो सकते हैं, लेकिन मूल निवास प्रमाणपत्र मकर तथा कुम्भ के संगम पर ही मिलेगा।
बस इस नक्षत्र के जातकों को एक ही सावधानी रखनी है—कहीं चाचा के उकसाने पर अपने पिता का रास्ता न रोक बैठें!
इनका चाचा चोरकूट में है, जिससे आप रोहिणी में पहले ही मिल चुके हैं।
वरना चोरी चाचा कर जाएगा और गर्दन कटेगी भतीजे की!
गणेश जी का उद्धार इसी में है कि वे चोर गणेश से दूर रहें। और यदि नजदीक भी रहें, तो उसके प्रभाव में न आएँ।