भ्रैं भ्रौं प्रां प्रीं
नक्षत्र विवरण वर्तमान प्रचलित Astrology और Astronomy के निर्धारित मापदण्डों से परे है! Reader has the full right not to believe it.
मंत्र: ॐ प्रीं पापपुरुषाय नमः
इस दार्शनिक रूपक में प्रेम को रोग और पूषान को पापी कहा गया है; प्रेम ही उनके पतन का कारण भी बनता है। अवैध और नाजायज प्रेम इस "प्राचीन पुष्य" की पहचान है। जो किसी से घृणा न करे और सभी को समान दृष्टि से सम्मान दे, उसे भी पापी कहना इस व्याख्या का विडंबनापूर्ण प्रश्न है। जो दैवीय व्यवस्था का भी साथ दे और साथ में असुरों का संरक्षण एवं मार्गदर्शन भी, ऐसी परस्पर विरोधी भूमिकाएँ निभाना सामान्य दृष्टि से समझना कठिन है। जिस पापसूर्य प्रामीथियस ने देवताओं की आग मनुष्यों को दी, वही तो अपराधी है मनुष्यों का जिसने बाद में उसी आग पर पानी फेर दिया। असुर मनुष्य शायद केवल ये ही नहीं समझ पाता कि अति किसी भी चीज की अच्छी नहीं होती और सुविधा कभी भी अपमान का अधिकार नहीं देती। यह वही पूषान है जिसने आदम को ईव के साथ सेक्स करना सिखाया। ब्रम्हचारी आदम का ब्रम्हचर्य भंग करने वाला इब्लिस भी यही पूषान है और स्वाधिष्ठान ही इसका स्थान है। आदम का प्रथम गुरु यह "पापपुरुष" ही है जिसे आप "यं" तथा "रं" से नहीं जला सकते। कामदेव का मित्र "वसंत पंचमी" वाला वसंत भी यही है जो बंदरों की सवारी करता है। Jews call him Azazeel; Hindus call him Bhainsasur; Goetica accidentally calls him Marbas. All religions consider him an enemy of their organized religions. If you go in search of Satan, you will find not one but at least five. Of the two goats offered to the Lord and Azajeel, one goes to this Zeta Piscem. Before falling from the grace of God Adam, he was the prince and lord of this earth. But after his transformation from an angel into a devil, he became the lord of prostitutes and beggars. Hindus claim this happened because he cut the throat of Bramha, but according to Abrahamic religions, he fell because he disobeyed God by not bowing before Svayambhu Adam.